जेजेपी विधायक ईश्वर सिंह के बिगड़े बोल आए सामने।

बारदाना घोटाला उजागर करने वाले शिकायतकर्ता को बताया कुत्ता।

शिकायतकर्ता ने बारदाना घोटाले में जेजीपी विधायक ईश्वर सिंह की मिलीभगत होने के लगाए थे आरोप।

विधायक ईश्वर सिंह पर अधिकारी को बचाने के भी लगाए थे आरोप।

घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भी नहीं करवाया गया मामला दर्ज।

जांच अधिकारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार और डीएफएससी कैथल ने जांच में पाया लाखों रुपए का घोटाला।

गुहला से जेजेपी विधायक ईश्वर सिंह हल्के में अपने बिगड़े बोल के लिए हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। ईश्वर सिंह की भाषा शैली और कड़वाहट को देखते हुए हल्के का प्रत्येक व्यक्ति उनके पास अपने किसी भी कार्य को लेकर जाने से कतराता हैं वही आज फिर ईश्वर सिंह के कड़वे और बिगड़े बोल फिर कैमरे के सामने आए हैं जिसमें जेजेपी विधायक ईश्वर सिंह ने अनाज मंडी में बारदाना घोटाला उजागर करने वाले शिकायतकर्ता को कुत्ता कहा। गौरतलब है कि बीते दिनों ही बारदाना घोटाले के शिकायतकर्ता चांद राम ने जेजेपी विधायक ईश्वर सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त पूरे मामले में विधायक की मिलीभगत है और विधायक के आशीर्वाद से ही पूरा घटाला हुआ है।विधायक ईश्वर सिंह इस पूरे मामले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस पूरे मामले का पर्दाफाश होने पर भी किसी के खिलाफ कार्रवाई ना होना और मामला दर्ज ना होना उच्च अधिकारियों पर भी सवाल खड़ा करता है और उच्च अधिकारियों का इस मामले में संलिप्त होना साफ दर्शाता है। इस पूरे मामले को लेकर जब ईश्वर सिंह से पूछा गया तो ईश्वर सिंह नेकहा कि मेरा क्या लेना-देना है इस पूरे मामले से मैं कौन सा आढती हूं और ईश्वर सिंह ने कैमरे के सामने ही शिकायतकर्ता को कुत्ता कहा और कहा कि ऐसे कुत्ते भोंकते रहते हैं जिनकी उन्हें कोई परवाह नहीं है।

इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव से इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि

गुहला चीका के अनाज मंडी में लाखों रुपए के बरदाना घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भी आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई ना होना विभाग के उच्च अधिकारियों पर भी सवाल खड़ा कर रही है। एसडीएम गुहला

शशि वसुंधरा द्वारा मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी के सदस्य तहसीलदार प्रदीप कुमार और नायब तहसीलदार वीरेंद्र सिंह डीएफएससी कैथल वरिंदर कुमार ने शुरुआती जांच में ही लाखों रुपए का घोटाला बता दिया था परंतु फिर भी विभाग द्वारा किसी भी अधिकारी या कर्मचारी जिसके द्वारा इस पूरे मामले ने घोटाला किया गया है उसके खिलाफ कोई भी मामला दर्ज नहीं करवाया गया और ना ही किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। 

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