गुहला-चीका
स्थानीय विधायक ईश्वर सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि विधानसभा गुहला धान बाहुल्य क्षेत्र है और हरियाणा सरकार ने इस क्षेत्र का जल स्तर नीचे जाने के कारण इसे डार्क जॉन में डाला है। किसानों का रूझान धान की बजाए दूसरी फसलों की ओर करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा धान के अतिरिक्त मक्का, अरहर, ग्वार, तिल व दूसरी फसलें लगाने वाले किसानों को 7 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि चूंकि इस विधानसभा क्षेत्र का किसान अब तक धान से अपनी आय अर्जित करता रहा है,धान इस क्षेत्र की पहचान है, धान से यहाँ के व्यापारियों का व्यापार जुड़ा हुआ है, इसीलिए किसानों को धान के विकल्प में फसलों को लगाने का सुझाव देना भी सरकार का दायित्व है। अत: हरियाणा सरकार से उनका अनुरोध है कि वह इस विधानसभा क्षेत्र के कृषक वर्ग को धानकी फसल से पूरी तरह विमुख न करते हुए उन्हें तीन महीने में धान की फसल की किस्म को लगाने की राहत प्रदान करें।
विधायक ईश्वर सिंह ने एक ओर सुझाव देते हुए सरकार से अनुरोध किया है कि यदि इस क्षेत्र के किसानों को धान का एक अच्छा विकल्प प्रदान करना है तो यहां ऐक शुगर मिल की स्थापना की जाए ताकि किसान धान की बजाए गन्ने की खेती की तरफ बढे़ और गन्ने की फसल को स्थानीय चीनी मिल में पिराई के लिए देकर अच्छा मुनाफा कमा सके। शुगर मिल से किसानों के साथ साथ क्षेत्र के युवकों को रोजगार भी मिलेगा,
उन्होंने स्पष्ट किया कि गन्ने की फसल एक साल में पक कर तैयार होती है और उसमें धान की तुलना में कई गुना कम पानी की खपत होती है, जैसा कि यह इलाका फलडेड है और यहाँ की जमीन कल्लर है तो यहाँ गन्ने की फसल ऐक अच्छा विकल्प है,क्योंकि धान या गन्ने के अलावा कोई अन्य फसल इस क्षेत्र में नहीं हो सकती, उन्होंने बताया पहले भी यहाँ बहुत तादात में गन्ना लगाया जाता था लेकिन कैथल शुगर मिल गन्ना किसानों की फसल की आपूर्ति करने में सक्षम न होने के चलते किसानों को जीरी की फसल की तरफ ध्यान देना पड़ा और इस कारण इस समय धान की फसल यहाँ बहुतायत है
विधायक ने कहा कि खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी किसानों को धान के अलावा दूसरी फसलों की तरफ रूझान बनाने की सलाह देते हुए और कृषि विकास अधिकारियों के साथ किसानों की मंत्रणा करवाकर श्यामलात व पंचायत की भूमि की बोली करवाए और उसे ठेके पर दें ताकि लीज पर भूमि लेने वाले किसान को किसी प्रकार का नुकसान भी न हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के गुहला व सीवन ब्लॉक में जीरी के अलावा अन्य फसलो को लगाए जाने के अनुरोध के चलते किसान पंचायती जमीनों को बोली पर लेने से पीछे हट रहे हैं जिसके चलते गुहला खंड के अब तक केवल 10 गांवों में पट्टेदारों ने अपनी लीज आगे बढ़ावा ली है, लेकिन अब तक सीवन खण्ड में पंचायती भूमि की बोली नहीं हो पाई । उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से लिखित में आग्रह किया गया है कम अवधि की धान लगाने की छूट दी जाए,उन्हें विश्वास है कि उनकी गुहला हल्के के किसानों की भलाई के लिए उठाई गई मांग पर सरकार जरूर साकारात्मक रूख अपनाएगी ।

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